कूडल संगम लिंगायत धर्मक्षेत्र

जगत के कयी स्वतंत्र धर्मों की तरह लिंगायत धर्म का अपना ही एक धर्मक्षेत्र है। यह विश्वगुरु बसवण्ण के ऐक्य स्थान का परम पवित्र क्षेत्र कूडलसंगम है। इसी धर्म भूमि में उन्होंने शिक्षा पाई, तपस्या की, और नवधर्म की घोषणा की, श्री गुरु बसवेश्वर की दिव्य समाधि दो नदियों के संगम स्थान में है। यदि हमारे पूज्य शरण और शिवयोगियो के ऐक्य होने के स्थान धर्म के क्षेत्र है तो, लिंगायत धर्मानुयायियों को जान लेना है कि कूडलसंगम को धर्मक्षेत्र मानकर वर्ष में एक बार क्यो न हो शरण मेले के अवसर पर उस पुण्यक्षेत्र का संदर्शन करना उनका कर्तव्य है।
अपने जीवन काल मे लिंगायत धर्मनुयायियों को अवश्य संदर्शन कीये जानेवाले कई महत्व के क्षेत्र है.

बिजापुर जिले के हुन्गुन्द ताल्लुक में स्थित एक गांव जो कृष्णा-मलप्रभा नदियों के दिव्य संग्म है। यहां विश्वगुरु बसवेश्वर लिंगैक्य होने के उपलक्ष्य मे इसको धर्मक्षेत्र नाम से घोषणा कि है। जैसे मुसलमान हज यात्रा के लिये मक्का जाते है वैसे हि शरण बसव धर्मानुयायि हर साल ’शरण मेला’ मे संक्रमण के समय यहा आते है। वह राष्ट्रिय मार्ग 13 से सिर्फ 7 किलोमिटर के अंदर हि स्थित कूडलसंगम हुनगुंद-अलमट्टि के बीच मे है। हुनगुंद, इळकल, बिजापुर, बागलकोट पास रहनेवालले बडे शहर है। लिंगायत धर्मियो की जागृति का उत्सव है ’शरण मेला’।

कूडल संगम चित्रशाला
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